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08 May 2011

पुरुषोत्तम सत्य प्रेमी

20‚ बागपुरा
सांवेर रोड
उज्जैन (म०प्र०)
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ललाट पर
नव विवाहिता के
शरद चाँद।



आदमी खड़ा
बिजूके की तरह
बीच शहर।


क्षत–विक्षत
हथेलियों के बीच
पसरी साँझ।


भली लगती
दूधिया‚ चाँदनी में
कार्तिक रात।


ब्याह न सकी
छाती पे धरी हई
क्वांरी आशाएँ।


नदी का जल
बढ़ता रहा आगे
पाथेय बना।


दूध के रिश्ते
सलीब पर चढ़े
आँख दिखाते।